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उत्तराखंड

उत्तराखंड में मंडरा रहा बिजली संकट: कम बर्फबारी से ग्लेशियरों की नदियां सूखीं, सर्दियों में पावर कट से निपटने की तैयारी

देहरादून। पिछले सीजन में कम बर्फबारी होने के कारण ग्लेशियरों से जुड़ी नदियों में पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है। इस प्राकृतिक बदलाव के चलते आने वाले सर्दियों के महीनों में राज्य के सामने संभावित बिजली संकट से निपटने की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।

जलविद्युत निगम ने पानी के स्टोरेज का सही इस्तेमाल करते हुए सर्दियों के दौरान अधिक से अधिक बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। वहीं दूसरी ओर, ऊर्जा निगम ने भी इस संभावित संकट से पार पाने के लिए अन्य वैकल्पिक स्रोतों से बिजली जुटाने के इंतजाम शुरू कर दिए हैं।

सर्दियों के दिनों में आमतौर पर यूजेवीएनएल का बिजली उत्पादन घटकर मात्र सात से आठ मिलियन यूनिट ही रह जाता है। इसके विपरीत, बरसात के समय यही बिजली उत्पादन अधिकतम 26 मिलियन यूनिट तक पहुंच जाता है, जिससे दोनों मौसमों का अंतर साफ दिखता है।

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इस बार चिंता की बात यह है कि बिजली का उत्पादन अक्टूबर महीने से ही नीचे गिरने लगा है और मौजूदा हाइड्रो उत्पादन गिरकर 23 मिलियन यूनिट पर आ पहुंचा है। इसी स्थिति को देखते हुए यूजेवीएनएल ने पानी के स्टोरेज का इस्तेमाल कर अपने प्लांटों को अधिक चलाकर उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया है।

यूजेवीएनएल के एमडी एके सिंह ने जानकारी दी है कि टोंस और यमुना बेसिन में पानी के फ्लो में कमी का सीधा प्रभाव हाइड्रो उत्पादन पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में उनका मुख्य ध्यान जल के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर केंद्रित है ताकि जल प्रबंधन बेहतर हो सके।

यूपीसीएल के लिए भी आने वाली सर्दियां एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली हैं क्योंकि ठंड के मौसम में बिजली की मांग 50 मिलियन यूनिट से भी ऊपर निकल जाती है। ऐसे समय में जब यूजेवीएनएल का आंतरिक उत्पादन सिर्फ सात से आठ एमयू रहता है, तब उपभोक्ताओं के लिए बिजली का इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है।

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इस विकट स्थिति से निपटने के लिए यूपीसीएल अब एनर्जी बैंकिंग के साथ-साथ शॉर्ट टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट पर विशेष रूप से फोकस कर रहा है। थर्मल पावर के साथ-साथ गैस आधारित पावर प्लांटों से भी अतिरिक्त बिजली जुटाने की व्यापक तैयारियां चल रही हैं।

प्रशासन और ऊर्जा निगम के इन वैकल्पिक प्रयासों का उद्देश्य यही है कि सर्दियों के पीक सीजन में राज्य के उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। जल और ऊर्जा प्रबंधन की यह रणनीति आने वाले दिनों में कितनी कारगर साबित होगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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