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उत्तराखंड

दून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहकों के फंसे 124 करोड़ रुपये, उधार लेकर खर्च चलाने को मजबूर हुए परिवार

दून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले ने शहर में हड़कंप मचा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने बैंक के पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह पूरा मामला वर्ष 2013-14 से 2015-16 के बीच अंजाम दिए गए फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसकी शिकायत बैंक की मुख्य शाखा के वर्तमान प्रबंधक रिंकू गौतम ने दर्ज कराई थी। एसपी सिटी प्रमोद कुमार के अनुसार, आरोपियों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए एक सोची-समझी साजिश के तहत बैंक को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई है। इन अधिकारियों ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कंप्यूटर सिस्टम में फर्जी एंट्री की और आम जनता व ग्राहकों की मेहनत की कमाई को हेराफेरी कर सीधे अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया।

इस घोटाले में शामिल मुख्य आरोपियों में बैंक के तत्कालीन सचिव स्वर्गीय आर.के. बंसल के अलावा सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर इंजीनियर गणेश चंद्र वार्ष्णेय, तत्कालीन शाखा प्रबंधक महावीर सिंह और संजय गुप्ता, तथा कार्यकारी शाखा प्रबंधक विजय मोहन भट्ट के नाम शामिल हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन लोगों ने इंजीनियर गणेश चंद्र वार्ष्णेय की तकनीकी मदद लेकर बैंक के सॉफ्टवेयर में गलत और फर्जी डेटा फीड किया, जिससे करोड़ों रुपये की निकासी को अंजाम दिया जा सका। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शहर कोतवाली में गुरुवार रात को ही कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी थी, ताकि भ्रष्टाचार के इस बड़े सिंडिकेट का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

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पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि आरोपियों ने बैंक से गबन किए गए इस काले धन का उपयोग आय से अधिक संपत्ति (प्रॉपर्टी) बनाने के लिए किया है। ऐसा माना जा रहा है कि घोटाले की राशि से शहर के विभिन्न हिस्सों में कई महंगी संपत्तियां खरीदी गई हैं, जिनका विवरण जल्द ही सार्वजनिक होने की उम्मीद है। मामले की तह तक जाने और हर एक वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच करने के लिए अब पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) सक्रिय हो गई है। एसआईटी का मुख्य उद्देश्य उन सभी अचल संपत्तियों की पहचान करना है जो जनता के पैसों की चोरी से खड़ी की गई हैं, ताकि उन्हें कानून के दायरे में लाकर आगे की उचित कार्यवाही की जा सके।

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वहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर लगाए गए लेनदेन प्रतिबंधों के कारण बैंक के हजारों खाताधारकों के करीब 124 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जिससे स्थानीय जनता को भारी आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इस सख्त पाबंदी की वजह से लोगों के रोजमर्रा और बेहद जरूरी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिसके चलते कई परिवारों को उधार लेकर अपना खर्च चलाना पड़ रहा है।

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