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उत्तराखंड

वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी में बड़े बदलाव की तैयारी: इलेक्ट्रिक इंजन पर सरकार देगी सब्सिडी

केंद्र सरकार अपनी स्क्रैपेज पॉलिसी में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत 10 से 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक या क्लीन फ्यूल (CNG/LNG) में बदलने (रेट्रोफिटमेंट) का विकल्प दिया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस योजना पर काम कर रहा है ताकि तकनीकी रूप से फिट गाड़ियों को पूरी तरह नष्ट करने के बजाय उनका जीवन विस्तार किया जा सके। इस कदम से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि करोड़ों निजी और व्यावसायिक वाहन मालिकों को आर्थिक राहत भी मिलेगी।

सरकार उठाएगी खर्च का हिस्सा

प्रस्ताव के अनुसार, ट्रक, बस और टेंपो जैसे व्यावसायिक वाहनों को इलेक्ट्रिक किट से लैस करने पर आने वाली कुल लागत का 15 से 25 फीसदी हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। इससे रेट्रोफिटमेंट कराना वाहन मालिकों के लिए सस्ता और सुलभ हो जाएगा।

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मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत

नई गाड़ी खरीदने के भारी आर्थिक बोझ से बचने के लिए रेट्रोफिटमेंट एक किफायती विकल्प बनकर उभरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन बदलवाने की लागत नई गाड़ी की तुलना में मात्र 30 से 40 फीसदी ही होती है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 2.44 करोड़ वाहन ऐसे हैं जो स्क्रैपेज पॉलिसी के दायरे में आते हैं, जिन्हें इस फैसले से नया जीवन मिल सकेगा।

अधिकृत केंद्रों का बनेगा नेटवर्क

सरकार देशभर में अधिकृत रेट्रोफिटमेंट केंद्रों का एक नेटवर्क तैयार करेगी। इन प्रमाणित केंद्रों से किट लगवाने के बाद ही वाहन को अगले पाँच वर्षों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। हालांकि, पुरानी गाड़ियों की बॉडी पर भारी बैटरी पैक के वजन और ब्रेकिंग सिस्टम के तालमेल को लेकर सुरक्षा मानकों पर अभी बारीकी से काम किया जा रहा है।

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रोजगार और पर्यावरण के लिए फायदेमंद

इस नई नीति से देश में एक नई ‘रेट्रोफिटमेंट इंडस्ट्री’ खड़ी होगी, जिससे हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, पुराने वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी और पुराने लोहे व कचरे के प्रबंधन की चुनौती भी कम होगी।

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