उत्तराखंड
उत्तराखंड खनन सुधारों में नंबर 1: धामी सरकार को केंद्र से 200 करोड़ विशेष सहायता
उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन सुधारों के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि और निर्णायक सुधार किए हैं। दरअसल उत्तराखंड सरकार ने यह दावा किया है कि ई-नीलामी व्यवस्था, सैटेलाइट से खनन क्षेत्रों की निगरानी, अवैध खनन पर कसी गई नकेल और आधुनिक माइनिंग सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करते हुए खनन लॉट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई है। यही नहीं राज्य सरकार की ओर से दावा किया गया है कि खनन अब उत्तराखंड की आय का प्रमुख स्त्रोत तक बन चुका है, जहां पहले खनन से करीब 300 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था तो वहीं अब यह बढ़कर 1200 करोड़ रुपये तक पहुंत चुका है।
उत्तराखंड को खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 200 करोड़ की विशेष सहायता राशि प्राप्त हुई है। यह राशि वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत पूंजी निवेश करने के लिए प्रदान की जाती है। वहीं सत्ताधारी दल भाजपा का मानना है कि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसीत उत्तराखंड के विजन को धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में जो खनन कुछ नेताओं की निजी कमाई का साधन हुआ करते थे, आज वही खनन उत्तराखंड के राजस्व और रोजगार सृजन का मजबूत आधार बना दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से प्रदान सहायता इस बात का पुष्ट प्रमाण है कि उत्तराखंड सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उत्तराखंड को बना डाला “खनन प्रदेश”
वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार की इस उपलब्धि पर सवाल उठाते हुए कहा कि खनन नीति के नाम उत्तराखंड की नदियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने जिस नीति को प्रोत्साहन दिया है वही नीति उत्तराखंड में अवैध खनन को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा पर खनन को लेकर सवाल समय-समय पर भाजपा के खेमे से ही उठते रहे हैं। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का उदाहरण देते हुए कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सदन में उत्तराखंड को खनन प्रदेश बनाने को लेकर बात कही थी, जबकि यह राशि आपदा प्रबंधन या ग्रीन बोनस के रूप में दी जानी चाहिए थी।
गौरतलब है कि एक ओर जहां धामी सरकार इसे पारदर्शी सुधारों और बढ़ते राजस्व की सफलता का जरिया बता रही है तो वहीं कांग्रेस पर्यावरण और आपदाओं का पेंच फंसाकर अपने सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि खनन से मिले इस प्रोत्साहन का इस्तेमाल राज्य सरकार किस दिशा में करती है।





