उत्तराखंड
उत्तराखंड वन भूमि अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर धामी सरकार सख्त, चरणबद्ध अतिक्रमण हटाने की योजना
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार अवैध अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई कर रही है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर नाराज़गी जताते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि आवासीय मकानों को छोड़कर खाली वन भूमि को तत्काल अपने कब्जे में लिया जाए, जिसके परिणाम स्वरुप वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। इस क्रम में राज्य सरकार द्वारा साल 2025 में 10,000 एकड़ से भी अधिक वन-भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, हालांकि, 71.05 प्रतिशत वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उत्तराखंड के कुल 53.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में से करीब 38 लाख हेक्टेयर वन भूमि है, लेकिन अप्रैल 2023 तक करीब 11,900 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया।
इतने बड़े वनीय भूभाग से अतिक्रमण को हटाना वन विभाग के लिए अब चुनौती बन चुका है, क्योंकि इसका सबसे बड़ा कारण है लीज”…. दरअसल, इन वन भूमि की लीज खत्म हो जाने के बावजूद भी वन विभाग द्वारा समय पर भूमि वापस नहीं ली गई, तो वहीं नई बसावटों का बढ़ना और वन गुर्जरों को चारे के लिए दी गई भूमि पर अवैध खेती होना इस चुनौती में आखिरी कील की तरह गढ़े हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग और प्रशासन ने ऋषिकेश में अतिक्रमण हटाने के दौरान भारी विरोध और तनाव का सामना भी किया, जिसके बाद सरकार ने अतिक्रमण मुक्त अभियान को और तेज कर दिया है।
अतिक्रमणित भूमि पर कराया जाएगा सर्वे-सुबोध उनियाल
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट कहा कि सप्रीम कोर्ट के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन किया जाएगा और किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि एक सवाल यह भी है कि इतने वर्षों तक अतिक्रमण होते रहे और उस समय किसी ने आपत्ति क्यों नहीं की, हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि घरों को छोड़कर नए और अवैध निर्माण रोके जाएं, और इसी दिशा में वन विभाग काम कर रहा है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि ऋषिकेश में बड़े पैमाने पर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, वहीं प्रशासन और वन विभाग द्वारा यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से करी जा रही है। इसमें पहले चरण में बड़े अतिक्रमण चिन्हित किए जा रहे हैं और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरी वन भूमि को खाली कराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे प्रदेश में वन विभाग की अतिक्रमित भूमि का विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहां-कहां और कितनी वन भूमि पर अवैध कब्जा है।
बहरहाल, उत्तराखंड में चुनावी वर्ष में अतिक्रमण हटाने का राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जहां विपक्ष सत्ताधारी दल भाजपा पर लोगों के आशियाने उजाड़ने का आरोप लगा रहा है तो वहीं सत्तरुढ़ भाजपा के लिए भी यह फैसला एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिख रहा है। हालांकि सरकार का कहना साफ है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।





