उत्तराखंड
कुमाऊनी लोकगायक दीवान कनवाल का निधन: अल्मोड़ा में शोक की लहर
उत्तराखंड के कुमाऊनी लोकसंगीत जगत को आज बड़ा सदमा पहुंचा। प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल उर्फ ‘दीवान दा’ का 65 वर्ष की आयु में बुधवार सुबह अल्मोड़ा के खत्याड़ी गांव स्थित अपने आवास पर निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे कनवाल का हाल ही में हल्द्वानी के निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। कुछ दिन पहले ही घर लौटे थे कि उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से अल्मोड़ा सहित पूरे कुमाऊं के सांस्कृतिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
अल्मोड़ा मुख्यालय के खत्याड़ी गांव के निवासी दीवान कनवाल कुमाऊनी लोकगीतों के धुरंधर थे। उनकी मधुर आवाज में पहाड़ी जीवन, प्रेम, विरह और संस्कृति झलकती थी। जिला सहकारी बैंक से मैनेजर पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने पूरे मन से लोकसंगीत को समर्पित कर दिया। उनके गीत जैसे ‘आज कुना मैत जा’, ‘हिट मेरी रंगीली’, ‘ना त्यार ना म्यार’, ‘मालुरा’ और ‘नंदा हमार गुसयां’ आज भी कुमाऊंनी भाषी लोगों के दिलों में बसे हैं। वे रामलीला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय थे।
दीवान कनवाल अपनी वृद्ध मां, दो विवाहित बेटों और दो बेटियों को छोड़ गए। पत्नी का पहले निधन हो चुका था। उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर बेतालेश्वर घाट पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक जताते हुए कहा कि उनका निधन लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है। सांस्कृतिक संगठन श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर रहे हैं। उनकी धुनें कुमाऊं की वादियों में हमेशा गूंजती रहेंगी।





