उत्तराखंड
हल्द्वाड़ी का दर्द: दूरस्थ पहाड़ी गाँव में 3 साल से खच्चरों के सहारे पेयजल आपूर्ति, नल में नहीं है जल
राजधानी देहरादून के रायपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली दूरस्थ पहाड़ी पंचायत हल्द्वाड़ी में पिछले तीन वर्षों से पीने के पानी की कोई ठोस योजना लागू नहीं हो पाई है, जिससे यहाँ के करीब 70 परिवारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीण मजबूर होकर प्राकृतिक जलस्रोतों से अपने सिर पर पानी ढोकर ला रहे हैं या फिर उन्हें खच्चरों की मदद से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते ग्रामीण जल संकट की मार झेलने को मजबूर हैं और पेयजल योजना का प्रस्ताव अभी भी फाइलों में ही धूल फांक रहा है।
खच्चरों और सिर पर ढोकर पानी लाने की मजबूरी
गांव में पानी का संकट इतना गहरा है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मीलों दूर स्थित प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है. कई ग्रामीण सिर पर पानी के डिब्बे रखकर लाते हैं, जबकि अन्य परिवार खच्चरों की मदद से पानी मंगवा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
प्राकृतिक आपदा और क्षतिग्रस्त जल लाइन
हल्द्वाड़ी गांव को मिलने वाली पेयजल लाइन टिहरी जिले के सुआसैंण प्राकृतिक जलस्रोत से आती है, जो लगभग 13 किलोमीटर लंबी है. पिछले तीन वर्षों से यह पंचायत लगातार बरसात और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है, जिसके कारण यह लंबी पाइपलाइन कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है. पिछले वर्ष मरम्मत के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे, जिससे जलापूर्ति ठप पड़ी है.
सौर पंपिंग योजना पर टिकी उम्मीदें
जल निगम ने इस संकट के समाधान के लिए 9.50 लाख रुपये का एक एस्टीमेट (अनुमानित बजट) बनाकर शासन को भेजा है. इस योजना के तहत गांव में एक सोलर पंपिंग योजना लगाई जानी प्रस्तावित है. अधिकारियों का मानना है कि यदि शासन से इस बजट को मंजूरी मिल जाती है, तो सोलर पंपिंग योजना को बिजली से जोड़कर गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जा सकेगी, जिससे ग्रामीणों को इस भारी किल्लत से निजात मिलेगी





