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उत्तराखंड

चिकित्सा शिक्षा…नर्सिंग अधिकारियों को तैनाती स्थल का इंतजार , सुस्त सिस्टम के चलते अटकी तैनाती, या हो रहा कोई बड़ा खेल….?

देहरादून: उत्तराखंड सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग में 1232 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश हुए एक हफ्ते का समय बीतने के बाद भी अब तक उन्हें तैनाती नहीं दी गई है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने बड़े समारोह के साथ इन नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे, लेकिन तैनाती स्थल तय करने में जिम्मेदार अधिकारी अब तक नाकाम साबित हुए हैं। इससे नर्सिंग अधिकारी असमंजस की स्थिति में हैं और जल्द से जल्द तैनाती की मांग कर रहे हैं।

नियुक्ति के बाद भी इंतजार

सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से इन नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की थी। इसके तहत भव्य आयोजन कर सभी को नियुक्ति पत्र दिए गए थे, लेकिन नियुक्ति के कई दिन बाद भी उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनकी तैनाती कहां होगी। इस देरी से न केवल नए नर्सिंग अधिकारियों में असंतोष है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

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प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है और नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति से इस समस्या का समाधान हो सकता था। लेकिन तैनाती स्थल तय करने में हो रही देरी से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि सिस्टम स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कितने गंभीर हैं। अगर नर्सिंग अधिकारियों की तुरंत तैनाती हो जाती, तो अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती थीं।नियुक्त नर्सिंग अधिकारी अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द उनकी तैनाती की प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि वे अपनी सेवाएं शुरू कर सकें। कई नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि अगर तैनाती में और देरी हुई, तो वे सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में स्टाफ की कमी की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त किए गए नर्सिंग अधिकारियों की तैनाती में हो रही देरी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे को कब तक हल कर पाती है।

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